नई उमंग भास्कर के संग

विकलांगो का पुर्नवास “विकलांगो के बिना संभव नही” इस विचारधारा को सरकारी एवं गौर सरकारी स्तर

पर श्री भास्कर मेहता ने अमलीजामा पहनाया। सरकारी क्षेत्र में जहाँ आपने प्राध्यापक के पद पर ३५ वर्ष के कार्यकाल के दौरान संस्कृत विषय में कई पुस्तकों का संपादन किया तथा अपने अध्यापन एवं शोधकार्यों से आपने अपने सहकमिंयो एवं विद्याथिंयो तथा पूरे समाज के सम्मुख यह सिद्ध किया कि आप अपनी प्रतिभा में किसी से भी उन्नीस नही है। वही गुजरात राज्य में विकलांगाआयुक्त के पद पर आप २००५ से २००८ तक कार्यरत रहे। इस पद पर रहकर आपने "निशक्त व्यक्ति" (सम्मन अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम १९९५ को लागू करने का यथासंभव प्रयास किया। इस दौरान आपने जहाँ एक ओर राष्ट्रीय स्तर पर विकलांगो के लिए बनने वाली नीतियो को प्रभावित किया, वही वषोँ से नासुलझी हुई विकलांगो की व्यक्तिगत, सामाजिक एवं संस्थागत समस्याओ को सुलझाने के उद्देश्य से अनेक ऐतिहासिक निर्णय दिए तथा समाज के उपेक्षित, प्रताडित एवं अदृश्य समझे जाने वाले इस वर्ग को उनके अधिकार दिलावाए। ऐसा करके आपने विकलांगो को बोझ एवं अदृश्य मानने वाली सैकडो वर्षो से चली आ रही परम्परा को चुनौती ती दी ही, साथ ही इन्हे समाज में आत्म सम्मान का स्थान दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस प्रकार आपने यह सिद्ध किया कि विकलांग समाज का अभिन्न अगं है, एवं समाज के लिए उपयोगी है।

गौर सरकारी क्षेत्र में आप दृष्टिबाधितो के लिए बने राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के संगठनों में पिछले लगभग ३५ वर्षो से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। मसलन ऑल इंडिया कंन्फैड्रेशन ओफ द ब्लाइंड (A.I.C.B.) के साथ आप पिछले ३०

सालो से जुडे हुए है। इस परिसंघकी कार्यकारिणी एवं महासभा में आपने अखिल

गुजरात अंधशिक्षाक संघ का प्रितनिधित्व समय-२ पर किया। इस परिसंघ में आपने २०००-२००५ के

दौरान सचिव के रूप में न केवल कार्यकारिणी के निर्णयो को प्रभावित किया अपितु कार्यकारिणी में लिए गए निर्णयो को लागू करने में भी आप की भूमिका को भुलाया नही जा सकता।

यही नही A.I.C.B. के द्वारा आयोजित कई सम्मेलनो जैसे (सन् २००१ में ब्रेल पर आयोजित राष्ट्री सम्मेलन में आपके एक सैशन के Pandist तथा Dec. 2004 मे लुधियाना में आयोजित सम्मेलन में कम्युनिटि बेस्ड Rehabilitation पर आपके द्वारा प्रभावशाली तरीके से वक्तव्य दिए गए। इसी परिसंघ के द्वारा क्रमशः सन् २००७ मे एक राष्ट्रीय सम्मेलन एवं २००८ मे अन्तराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किए गए जिनमें आपको सैशन की अध्यक्षता करने का गौरव प्राप्त हुआ। अपने इन सैशन को जिस लौकतान्त्रिक ढंग से आपने चलाया उसकी सराहना इन सम्मेलनों में आये प्रतिनिधियो के द्वारा की गई हैं।

अपने सभी कार्यक्रमो में A.I.C.B. पुरुषों एवं महिलाओ को पुर्नवास के समान अवसर प्रदान किए जाते हैं। लुधियाना में सन् २००५ में हुई अपनी साधारण सभा की बैठक में A.I.C.B. की महासभा ने यह प्रस्ताव पास किया कि परिसंघ के सबी प्रतिनिधिसंस्थाए या तो अपने संविधान में संशोधन करके या फिर प्रस्ताव पास करके दृष्टि-बाधित महिलाओ को पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी में कम से कम एक तिहाई स्थान दे। साधारण सभा के इस निर्णय को गुजरात राज्य में A.I.C.B. महिलामंच के प्रतिनिधियों द्वारा लागू करने का प्रयास किया गया उन्होने अपने राज्य में मौजूद दृष्टिहीनो की विभिन संस्थाओं के पदाधिकारियों की एक दिवसीय बैठक २००५ में आयोजित कि, उसे आयोजित करने में तथा इस प्रस्ताव को व्यवहारिक रूप दिलवाने में आपकी भूमिका को सराहा जाता रहेगा।

आपना न के वल A.I.C.B. के विभिन्न कार्यक्रमों मे अपनी भूमिका निभाई अपितु नेशनल एसोसिएशन फोर द ब्लाईड (N.A.B.) मे १९९९ से अब तक, एवं १९७६ से १९८४ तक नेशनल फेडरेशन आफ द ब्लाइंड (N.F.B.) जैसी संस्थाओं में भी यथासम्भव अपना योगदान दिया। क्योकि आपका उद्देश्य संस्थागत भेदभाव से ऊपर ऊढ कर सामान्य दृष्टिबाधित का पुनर्वास करना था इसलिए आप प्रत्येक संस्था के साथ उसके परिवार के सदस्य के रूप में जुड़े व दृष्टि बाधितो के पुर्नवास के कार्यों मे लगे रहे।

अपनी सामाजिक भूमिकाओ का कुशलतापूर्वक निर्वाह करने के साथ-साथ आपने कभी अपनी पारिवारिक

और व्यक्तिगत जिम्मेदारियो से मुहं नही मोडा। अपने बच्चो को उच्च शिक्षा दी। एवं पत्नी को सदैव आदर एवं सम्मान दिया। एक व्यक्ति के रूप में आप एक अच्छे इसांन है। अपने जीवन की विपरीत परिस्थियों में भी आपको धैर्य नही खोया व उनका सामना किया। और आज जब आप अपने जीवन में प्रगति के चरम शिखर पर है अभिमान को आपने अपने निकट फटकने भी नही दिया।

हम आशा करते है कि वृद्धावस्या में भी आप समाज, परिवार एवं अपने प्रति अपने उत्तदायित्व का निर्वाह यथासम्भव करते रहेगें। और ऐसा करने के लिए हम ईश्वर से यह प्रार्थना करते हैं कि वे आपको इतनी शक्ति दे जिससे कि आप अपनी जिम्मेदारियो को निभा सकें।

-मजुला राथ